नाम रै पाछै री धरती
साचो राजस्थान
राजस्थान खाली महल अर फोटू कोनी। आ लांबी दूरियां, धीरज आळा लोगां अर जूनी कारीगरी री मेहनती धरती है — अर यो ई राजस्थान म्हैं आपणै हर काम में साथै ले'र चालूं।


रेत अर वठै रा लोग
थार सूनो कोनी। वठै खेती होवै, ढोर पळै, अर लोग थोड़ै से पाणी में सँभळ'र जीवणो सीख ग्या। गांव दूर-दूर बसीज्योड़ा है, अर मेहमानगती रिवाज कोनी, फ़र्ज़ मानीजै — अजाणै नै नांव पूछण सूं पैलां पाणी दीजै।

गढ़ अर उणां रै नीचै रो जीवण
गढ़ तो सारी दुनिया जाणै, पण साची बात उणां रै नीचै है: गळियां, कारखाना, अर वै कुटम्ब जका पीढ़ियां सूं उणी भींतां री छांव में रैवै। वठै इतिहास कांच में बंद कोनी, आज ई जीयीजै।
म्हैं इणी ठौड़ां नै देखतो-देखतो बडो हुयो। म्हैं इणां री फोटू इण खातर खींचूँ कै वे राजस्थान री एक और आम फोटू बणकर ना रैय जावै।

कारीगरी, रोज़ रो काम
छपाई, आरसी रो काम, चांदी, चामड़ो, कठपूतळी, लोकगीत — ये यादगारी चीजां कोनी। ये कुटम्बां में चालती आई कारीगरी है, हाथ सूं होवै, अर उणां रै सामी परखीजै जका साचै काम अर नकल रो फरक जाणै।

थाळी
दाळ बाटी चूरमो वा थाळी है जकी नै सगळा जाणै, अर आ ई जगै नै ठीक समझावै: सादो सामान, धीमी आंच, अर इतनो कै जको ई आ जावै, पेट भर'र जीमै। वठै खाणो दिखावै सारू कोनी, बांटण सारू बणै।

रंग, तीज-त्यूंहार अर गीत
रेत अर पाथर री धरती माथै रंग सोच'र चुणीजै। पागड़ी, ओढ़णी अर दरवाजा जाण-बूझ'र चटक रंगीजै। बरस त्यूंहारां सूं नापीजै — तीज, गणगौर, होळी, दीवाळी, अर पुष्कर-नागौर रा मोटा मेळा — अर हरेक त्यूंहार गीत लेय'र आवै। आंगणां में घूमर अर कालबेलिया होवै, अर मांगणियार-लंगा गवैया वै गीत सांभळ्या है जका म्हांसूं घणा पैलां बण्या।

रोज रो जीवण
सवेर जल्दी अर चुपचाप ऊगै: पैलां ढोर, पछै चा। घणा गांवां में पाणी आज ई पगां सूं ल्यायो जावै, अर कीं ई बरबाद कोनी होवै। घर सादा है, आंगण साझा, अर बडेरां सूं मिलणो ई कोनी, पूछणो ई होवै। जीवण धीमो है, पण खाली कोनी — यो गरमी, दूरी अर रुत रै हिसाब सूं बंध्योड़ो है।

रोजी-रोटी
घणा कुटम्ब धरती सूं जीवै: बाजरो, सरसूं, ग्वार अर चणो, साथै गायां, बकरियां, भेडां अर ऊंट। खेती रै अलावा राजस्थान पाथर अर संगमरमर में, रंगाई-छपाई रा कस्बां में, चांदी अर चामड़ै री कारीगरी में, अर हिवडै तांई सैलाणी काम में लाग्योड़ो है। घणा घर उण बेटै या भाई माथै ई टिक्योड़ा है जको बारै कमाय'र पईसो घरै भेजै।

वठै रा लोग
पागड़ी बताय दे कै मिनख कठै रो है, अर घणी बार आ ई कै करै कांई है। लोग मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूंढाड़ी अर हिंदी एक ई सांस में बोलै। वठै जबान रो वजन है — आंगणै में दियोड़ो वचन निभायो जावै। बात सीधी, मनवार मोटी, अर आपणी धरती रो मान खुल'र पैर्योड़ो।
म्हे कांई जीमां
थोड़ो पाणी, लांबी गरमी अर पावणै नै भूखो नीं राखण री आदत — राजस्थानी रसोई रो सगळो हिसाब यो ई है।
दाळ बाटी चूरमो
अंगारां माथै सिक्योड़ी बाटी, दाळ अर मीठो चूरमो, ऊपर घी। हरेक त्यूंहार अर जमावड़ै री थाळी।
लाल मास
मथाणियां री तीखी मिरच अर दही में पक्योड़ो मटन। शिकार रो जीमण, जको घर-घर पूग ग्यो।
गट्टै री सब्जी
बेसण रा गट्टा दही री तरी में — वठै बण्या जठै हरी तरकारी मुसकल सूं मिळती।
केर सांगरी
रेत री सूखी बेर अर फळियां, झाड़ियां सूं बीण'र मसालै में पकाईजै। रेगिस्तान आप नै जिमावै।
बाजरै री रोटी अर लसण री चटणी
बाजरै री रोटी, सफेद माखण अर कांचै लसण री चटणी। खेतां रो रोज रो जीमण, अर आज ई सगळां सूं बढ़िया।
घेवर अर मावा कचौरी
तीज अर ब्यावां सारू राखीजी मिठाई — जाळीदार, चाशणी में डूब्योड़ी, अर कुटम्ब सूं घणी आगै बांटीजै।
राजस्थान कोई पहरावो कोनी। आ जीवण रो वो ढंग है जको धीरज मांगै।
